हिमाचल के स्कूलों में एसएमसी का नया ढांचा: पुनर्गठन, नई जिम्मेदारियां और सख्त नियम लागू

हिमाचल के स्कूलों में एसएमसी का नया ढांचा: पुनर्गठन, नई जिम्मेदारियां और सख्त नियम लागू

New SMC Framework in Himachal Schools

New SMC Framework in Himachal Schools

शिमला। New SMC Framework in Himachal Schools, हिमाचल के सरकारी स्कूलों में अब स्कूल प्रबंधन समितियों (एसएमसी) का गठन नए सिरे से किया जाएगा। एसएमसी के गठन में बदलाव के साथ-साथ उन्हें नई जिम्मेदारियां भी दी गई हैं। शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी गाइडलाइन के अनुसार एसएमसी का गठन किया जाएगा। समग्र शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशक राजेश शर्मा ने इस संबंध में प्रदेश के सभी उपनिदेशकों (उच्च एवं प्रारंभिक शिक्षा) और उपनिदेशकों (गुणवत्ता) को निर्देश जारी किए हैं।

स्कूलों में संसाधन जुटाने, आधारभूत ढांचे को मजबूत करने और सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने के लिए विभिन्न विभागों और कार्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) गतिविधियों के साथ समन्वय स्थापित करने का कार्य भी एसएमसी करेगी। 

निदेशालय भेजनी होगी अनुपालन रिपोर्ट

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के अनुरूप नई एसएमसी गाइडलाइन जारी की गई है, जो पहले की सभी व्यवस्थाओं का स्थान लेगी। समग्र शिक्षा ने सभी जिलों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने अधिकार क्षेत्र के सभी सरकारी एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों में नई गाइडलाइन के अनुसार एसएमसी का पुनर्गठन सुनिश्चित कर पांच जुलाई तक अनुपालन रिपोर्ट निदेशालय भेजें।

30 जून तक की डेडलाइन

नई व्यवस्था के अनुसार, एसएमसी को प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष का सोशल ऑडिट कराना अनिवार्य होगा। स्कूल खुलने के एक माह के भीतर एसएमसी का गठन करना आवश्यक रहेगा। इस बार गाइडलाइन देरी से जारी हुई है, इसलिए एसएमसी गठन के लिए 30 जून तक की डेडलाइन तय की गई है। राज्य सरकार ने इन दिशा निर्देशों को बिना किसी संशोधन के पूरे प्रदेश में लागू करने को मंजूरी प्रदान कर दी है। 

एक ही होगी समिति

नई गाइडलाइन के तहत सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी विद्यालयों में केवल एक ही स्कूल प्रबंधन समिति होगी। अब अलग से स्कूल प्रबंधन एवं विकास समिति (एसएमडीसी) का गठन नहीं किया जाएगा। एसएमसी सदस्यों का कार्यकाल दो वर्ष निर्धारित किया गया है। प्रत्येक माह कम से कम 50 प्रतिशत कोरम के साथ बैठक आयोजित करना अनिवार्य होगा। एसएमसी को स्कूल विकास योजना और वार्षिक उपयोजना तैयार करनी होगी।